उदासी का साया: फ़ुरक़ान एस ख़ान की मार्मिक नज़्म
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'उदासी का साया' एक मार्मिक नज़्म है जो जीवन में उदासी की गहरी और अटूट उपस्थिति को दर्शाती है।
उदासी का साया हर कदम के साथ चलता है
जैसे कोई पुराना साथी जो कभी नहीं बदलता है
आँखों में नमी, दिल में एक बोझ सा रहता है
रूह में उतरकर यह दर्द गहरा होता चला जाता है
खामोशी में घुलता, तन्हाई में पलता है
एक अनकहा एहसास जो कभी नहीं निकलता है
हर साँस के साथ, यह और भी सघन होता है
यह कैसा रिश्ता है जो कभी नहीं बिखरता है
Kaafiya चलता, बदलता, रहता, जाता, पलता, निकलता, होता, बिखरता
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
गम का बोझ लिए फिरता हूँ हर रात
कोई नहीं सुनता मेरे दिल की बात
चेहरे पर मुस्कान है, अंदर एक तूफान है
यह कैसी ज़िंदगी है, यह कैसा इम्तिहान है
अंधेरों में खोया, आँसुओं में धोया
हर लम्हा लगता है, जैसे कुछ अनमोल खोया
यह खालीपन, यह सूनापन
क्यूँ इतना गहरा है, मेरा मन
Kaafiya रात, बात, तूफान, इम्तिहान, खोया, धोया, सूनापन, मन
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
बुझते चिराग हैं उम्मीदों के सारे
बिखर गए हैं ख्वाब, जैसे टूटे तारे
दिल में एक टीस है, आँखों में नमी है
लगता है हर तरफ बस तेरी कमी है
यह कैसा सन्नाटा, यह कैसी उदासी
जो घेर लेती है हर खुशी की बासी
कोई रास्ता नहीं, कोई किनारा नहीं
बस दर्द है हर तरफ, कोई सहारा नहीं
Kaafiya सारे, तारे, नमी, कमी, उदासी, बासी, रास्ता, किनारा, सहारा
Radeef नहीं
F
Poetry ByFurkan S Khan
उदासी का साया
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: चलता, बदलता, रहता, जाता, पलता, निकलता, होता, बिखरता | Radeef: है
उदासी का साया हर कदम के साथ चलता है
जैसे कोई पुराना साथी जो कभी नहीं बदलता है
आँखों में नमी, दिल में एक बोझ सा रहता है
रूह में उतरकर यह दर्द गहरा होता चला जाता है
खामोशी में घुलता, तन्हाई में पलता है
एक अनकहा एहसास जो कभी नहीं निकलता है
हर साँस के साथ, यह और भी सघन होता है
यह कैसा रिश्ता है जो कभी नहीं बिखरता है
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: रात, बात, तूफान, इम्तिहान, खोया, धोया, सूनापन, मन | Radeef: है
गम का बोझ लिए फिरता हूँ हर रात
कोई नहीं सुनता मेरे दिल की बात
चेहरे पर मुस्कान है, अंदर एक तूफान है
यह कैसी ज़िंदगी है, यह कैसा इम्तिहान है
अंधेरों में खोया, आँसुओं में धोया
हर लम्हा लगता है, जैसे कुछ अनमोल खोया
यह खालीपन, यह सूनापन
क्यूँ इतना गहरा है, मेरा मन
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: सारे, तारे, नमी, कमी, उदासी, बासी, रास्ता, किनारा, सहारा | Radeef: नहीं
बुझते चिराग हैं उम्मीदों के सारे
बिखर गए हैं ख्वाब, जैसे टूटे तारे
दिल में एक टीस है, आँखों में नमी है
लगता है हर तरफ बस तेरी कमी है
यह कैसा सन्नाटा, यह कैसी उदासी
जो घेर लेती है हर खुशी की बासी
कोई रास्ता नहीं, कोई किनारा नहीं
बस दर्द है हर तरफ, कोई सहारा नहीं
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