प्रेरणा का सफर: फ़ुरक़ान एस खान की मोटिवेशनल ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस खान द्वारा लिखित प्रेरणादायक ग़ज़ल 'प्रेरणा का सफर' पढ़ें। यह ग़ज़ल आपको जीवन की चुनौतियों का सामना करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

Wednesday, August 26, 2026
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प्रेरणा का सफर: फ़ुरक़ान एस खान की मोटिवेशनल ग़ज़ल
“प्रेरणा का सफर: फ़ुरक़ान एस खान की मोटिवेशनल ग़ज़ल”
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26 August 2026
प्रेरणा का सफर: फ़ुरक़ान एस खान की मोटिवेशनल ग़ज़ल
Ghazal
हौसलों की राह पर, ऐ दिल ज़रा संभल, चल। गिर के उठना है तुझे, बस तू हमेशा चल। धूप हो या छाँव हो, हर हाल में तू अचल रह, मंज़िलों की ओर अपनी, तू निडर हो चल। भेद सारे खोल दे, अब डर से बाहर निकल, जीत तेरी इंतज़ार में है, तू कदम बढ़ा चल। ख्वाबों को उड़ान दे, क्यों यूँ ही तू मचल, पर हैं तेरे पास, तू आसमान में चल। फ़ुरक़ान कहे, हिम्मत न हार कभी, ओ नादान, कर्म का ही मीठा मिलता है फल, तू बस आगे चल।
Kaafiya संबल, अचल, निकल, मचल, फल Radeef चल
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
दिल में जो आग है, वो बात है कही, सही। रास्ता वो ही है, जो मंजिल को दिखा दे सही। छोड़ दे बंदिशें सब, जो तुझे रोके रही, आज़ादी की उड़ान भर, अब उड़ जा तू सही। तेरी तकदीर बदलेगी, अगर चाहत है वही, मेहनत से सींच इसे, फल मिलेगा सही। इस धरती (मही) पर तेरी पहचान है, तू क्यों डरा, कर दे कुछ ऐसा कमाल, सब कहें तू है सही। फ़ुरक़ान की कलम से, ये पैगाम है यही, खुद पर रख विश्वास, राह तेरी होगी सही।
Kaafiya कही, रही, वही, मही, यही Radeef सही
F Poetry ByFurkan S Khan

प्रेरणा का सफर

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: संबल, अचल, निकल, मचल, फल  |  Radeef: चल
हौसलों की राह पर, ऐ दिल ज़रा संभल, चल। गिर के उठना है तुझे, बस तू हमेशा चल। धूप हो या छाँव हो, हर हाल में तू अचल रह, मंज़िलों की ओर अपनी, तू निडर हो चल। भेद सारे खोल दे, अब डर से बाहर निकल, जीत तेरी इंतज़ार में है, तू कदम बढ़ा चल। ख्वाबों को उड़ान दे, क्यों यूँ ही तू मचल, पर हैं तेरे पास, तू आसमान में चल। फ़ुरक़ान कहे, हिम्मत न हार कभी, ओ नादान, कर्म का ही मीठा मिलता है फल, तू बस आगे चल।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: कही, रही, वही, मही, यही  |  Radeef: सही
दिल में जो आग है, वो बात है कही, सही। रास्ता वो ही है, जो मंजिल को दिखा दे सही। छोड़ दे बंदिशें सब, जो तुझे रोके रही, आज़ादी की उड़ान भर, अब उड़ जा तू सही। तेरी तकदीर बदलेगी, अगर चाहत है वही, मेहनत से सींच इसे, फल मिलेगा सही। इस धरती (मही) पर तेरी पहचान है, तू क्यों डरा, कर दे कुछ ऐसा कमाल, सब कहें तू है सही। फ़ुरक़ान की कलम से, ये पैगाम है यही, खुद पर रख विश्वास, राह तेरी होगी सही।

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Zainab Khatoon
लेखक

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