उदासी भरी ग़ज़ल: Furkan S Khan की कलम से | दर्द और तन्हाई का बयाँ

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई एक मार्मिक ग़ज़ल, जो उदासी, दर्द और जुदाई के एहसास को बयां करती है। तन्हाई के लम्हों का खूबसूरत चित्रण।

Tuesday, August 25, 2026
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उदासी भरी ग़ज़ल: Furkan S Khan की कलम से | दर्द और तन्हाई का बयाँ
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25 August 2026
उदासी भरी ग़ज़ल: Furkan S Khan की कलम से | दर्द और तन्हाई का बयाँ
Ghazal
हर लम्हा तेरी यादों का, अब बोझ सा लगता है, ज़िंदगी का हर पल, तन्हाईओं में कटता है। वो हँसी, वो बातें, सब कुछ धुँधला गया है, आँखों में आँसू, और दिल में दर्द बसता है। साँसों में तेरी खुशबू, अब भी महसूस होती है, पर तू नहीं है पास, यह हकीकत चुभती है। ये वक़्त भी गुज़र जाएगा, कहते हैं सब मुझको, पर कैसे समझाऊँ, ये दिल कब मानता है। हर आहट पे चौंक उठना, तेरा इंतज़ार करना, ये कैसी बेकरारी है, जो चैन से न रहने देता है।
Kaafiya आँखों, साँसों Radeef में
F Poetry ByFurkan S Khan

उदासी के लम्हे

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: आँखों, साँसों  |  Radeef: में
हर लम्हा तेरी यादों का, अब बोझ सा लगता है, ज़िंदगी का हर पल, तन्हाईओं में कटता है। वो हँसी, वो बातें, सब कुछ धुँधला गया है, आँखों में आँसू, और दिल में दर्द बसता है। साँसों में तेरी खुशबू, अब भी महसूस होती है, पर तू नहीं है पास, यह हकीकत चुभती है। ये वक़्त भी गुज़र जाएगा, कहते हैं सब मुझको, पर कैसे समझाऊँ, ये दिल कब मानता है। हर आहट पे चौंक उठना, तेरा इंतज़ार करना, ये कैसी बेकरारी है, जो चैन से न रहने देता है।

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Zainab Khatoon
लेखक

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