प्रेरणादायक क़िता: उठो, बढ़ो! - Furkan S Khan
फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित प्रेरणादायक क़िता 'उठो, बढ़ो!'। यह कविता आपको जीवन की मुश्किलों का सामना करने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देगी।
पथ कठिन है तो क्या हुआ, हिम्मत ना हारो तुम।
मंज़िलें मिलेंगी ज़रूर, बस कदम बढ़ाओ तुम।
हर मुश्किल को चीरकर, आगे बढ़ते जाओ तुम।
जीत तुम्हारी ही होगी, बस चलते जाओ तुम।
Kaafiya हारो, बढ़ाओ, जाओ
Radeef तुम
F
Poetry ByFurkan S Khan
अंधेरों से ना घबराना, इक किरण बाकी है।
दिल में जगा ले हौसला, अभी उड़ान बाकी है।
हर चुनौती से लड़ना है, ये इम्तिहान बाकी है।
नया सवेरा आएगा, बस थोड़ी जान बाकी है।
Kaafiya किरण, उड़ान, इम्तिहान, जान
Radeef बाकी है
F
Poetry ByFurkan S Khan
संघर्षों से ना घबराना, मंज़िल दूर नहीं कभी।
जो डटे रहे मैदान में, वो हारे नहीं कभी।
मेहनत का फल मिलता है, ये बात भूलो नहीं कभी।
विश्वास जो रखता मन में, वो टूटा नहीं कभी।
Kaafiya दूर, हारे, भूलो, टूटा
Radeef नहीं कभी
F
Poetry ByFurkan S Khan
उठो, बढ़ो!
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: हारो, बढ़ाओ, जाओ | Radeef: तुम
पथ कठिन है तो क्या हुआ, हिम्मत ना हारो तुम।
मंज़िलें मिलेंगी ज़रूर, बस कदम बढ़ाओ तुम।
हर मुश्किल को चीरकर, आगे बढ़ते जाओ तुम।
जीत तुम्हारी ही होगी, बस चलते जाओ तुम।
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: किरण, उड़ान, इम्तिहान, जान | Radeef: बाकी है
अंधेरों से ना घबराना, इक किरण बाकी है।
दिल में जगा ले हौसला, अभी उड़ान बाकी है।
हर चुनौती से लड़ना है, ये इम्तिहान बाकी है।
नया सवेरा आएगा, बस थोड़ी जान बाकी है।
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: दूर, हारे, भूलो, टूटा | Radeef: नहीं कभी
संघर्षों से ना घबराना, मंज़िल दूर नहीं कभी।
जो डटे रहे मैदान में, वो हारे नहीं कभी।
मेहनत का फल मिलता है, ये बात भूलो नहीं कभी।
विश्वास जो रखता मन में, वो टूटा नहीं कभी।
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