खुशियों का आगाज़: उमंग और प्रेम से भरा हिंदी रुबाई | Furkan S Khan
Furkan S Khan की यह सुंदर हिंदी रुबाई 'खुशियों का आगाज़' जीवन में नई उमंग, दोस्ती और प्यार का जश्न मनाती है। सकारात्मकता और प्रेरणा से भरी यह कविता हर पल को अनमोल बनाती है।
उमंग: उत्साह, जोश मलंग: मस्त, बेपरवाह गिले-शिकवे: शिकायतें, मनमुटाव धकेलने: पीछे हटाना हर सू: हर दिशा में, हर तरफ जश्न-ए-बहार: वसंत का उत्सव, खुशी का त्यौहार सार: निचोड़, महत्व
अंतर्मन: भीतर का मन, आत्मा संवरता: सुधरता, सुंदर होता क्षणिक: थोड़े समय के लिए शुक्रगुज़ारी: आभार, धन्यवाद रहमत: कृपा, दया आत्म-बोध: स्वयं को जानना, आत्मज्ञान भ्रांतियाँ: भ्रम, गलतफहमियाँ रूह: आत्मा रौनक: चमक, सुंदरता पड़ाव: पड़ाव, चरण मालामाल: संपन्न, धनी
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