खुशियों का आगाज़: उमंग और प्रेम से भरा हिंदी रुबाई | Furkan S Khan

Furkan S Khan की यह सुंदर हिंदी रुबाई 'खुशियों का आगाज़' जीवन में नई उमंग, दोस्ती और प्यार का जश्न मनाती है। सकारात्मकता और प्रेरणा से भरी यह कविता हर पल को अनमोल बनाती है।

Sunday, September 20, 2026
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खुशियों का आगाज़: उमंग और प्रेम से भरा हिंदी रुबाई | Furkan S Khan
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20 September 2026
खुशियों का आगाज़: उमंग और प्रेम से भरा हिंदी रुबाई | Furkan S Khan
Rubai
आज हर दिल में खुशियों का रंग है, जीवन में एक नई उमंग है। भूलकर सब गिले-शिकवे पुराने, हर चेहरा देखो कितना मलंग है। ये पल हैं जो हमें मिल-जुलने को, खुशियाँ बाँटकर साथ चलने को। प्यार की राहें रोशन होती जाएँ, सारे गमों को पीछे धकेलने को। हर ज़ुबाँ पे मीठे गीत छा गए, दिल के सारे दुख-दर्द मिटा गए। रौशनी फैली है हर सू आज, अंधेरे को दूर भगा गए। आओ मनाएँ ये जश्न-ए-बहार, हर साँस में भर लें खुशियों का सार। कल की फ़िक्र न कर, जी ले आज को, ये पल फिर न आएँगे बार-बार।
Kaafiya रंग, उमंग, मलंग, जुलने, चलने, धकेलने, छा, मिटा, भगा, बहार, सार, बार
F Poetry ByFurkan S Khan
Rubai
जब मन में शांति का दीप जलता है, तब जीवन का हर पल संवरता है। बाहर की चकाचौंध तो क्षणिक है, सच्चा उत्सव तो भीतर ही पलता है। शुक्रगुज़ारी का जब भाव उमड़ता है, हर छोटी खुशी से मन भरता है। शिकायतों का बोझ उतर जाता है, जब प्रभु की रहमत पे ध्यान धरता है। आत्म-बोध की जब किरणें फूटती हैं, सारी भ्रांतियाँ मन से छूटती हैं। अपने होने का एहसास गहरा हो, तब रूह में सच्ची रौनक जुटती हैं। जीवन के हर पड़ाव को गर हम मनाएँ, हर चुनौती में भी सीख हम पाएँ। संतोष की दौलत से जब दिल हो मालामाल, फिर क्यों न हम हर पल मुस्कुराएँ।
Kaafiya जलता, संवरता, पलता, उमड़ता, भरता, धरता, फूटती, छूटती, जुटती, मनाएँ, पाएँ, मुस्कुराएँ
F Poetry ByFurkan S Khan

उमंग: उत्साह, जोश मलंग: मस्त, बेपरवाह गिले-शिकवे: शिकायतें, मनमुटाव धकेलने: पीछे हटाना हर सू: हर दिशा में, हर तरफ जश्न-ए-बहार: वसंत का उत्सव, खुशी का त्यौहार सार: निचोड़, महत्व

अंतर्मन: भीतर का मन, आत्मा संवरता: सुधरता, सुंदर होता क्षणिक: थोड़े समय के लिए शुक्रगुज़ारी: आभार, धन्यवाद रहमत: कृपा, दया आत्म-बोध: स्वयं को जानना, आत्मज्ञान भ्रांतियाँ: भ्रम, गलतफहमियाँ रूह: आत्मा रौनक: चमक, सुंदरता पड़ाव: पड़ाव, चरण मालामाल: संपन्न, धनी

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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