इश्क का दरिया - Furkan S Khan द्वारा रचित हिंदी ग़ज़ल
Furkan S Khan द्वारा रचित एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल जो इश्क और मोहब्बत की गहराई को दर्शाती है।
तेरी आँखों में मोहब्बत का गहरा असर है
मेरी रूह का अब तो बस यही एक डगर है
ढूंढता फिरता हूँ मैं खुद को जहाँ में मगर
तेरी यादों का मेरे दिल में ही घर है
Kaafiya नजर, असर, डगर
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
मेरे रूबरू तू आज भी कितना पास है
तेरी खुशबू का मुझमें ही एक एहसास है
तू जो नहीं तो ये महफिल भी वीरान है
मेरे लिए बस तेरा होना ही सबसे खास है
Kaafiya पास, एहसास, खास
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
इश्क का दरिया
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: नजर, असर, डगर | Radeef: है
तेरी आँखों में मोहब्बत का गहरा असर है
मेरी रूह का अब तो बस यही एक डगर है
ढूंढता फिरता हूँ मैं खुद को जहाँ में मगर
तेरी यादों का मेरे दिल में ही घर है
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: पास, एहसास, खास | Radeef: है
मेरे रूबरू तू आज भी कितना पास है
तेरी खुशबू का मुझमें ही एक एहसास है
तू जो नहीं तो ये महफिल भी वीरान है
मेरे लिए बस तेरा होना ही सबसे खास है
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
27°C Riyadh
Comments (0)