विरह की अग्नि - एक रूहानी सूफी कविता
फरकान एस खान द्वारा रचित एक भावपूर्ण सूफी कविता जो विरह और रूहानी तड़प को दर्शाती है।
विरह: जुदाई या तड़प; वजूद: अस्तित्व; पनाह: शरण; निबाह: संबंध बनाए रखना या निर्वाह करना।
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