दिल टूटा ग़ज़ल: Furkan S Khan की दर्द भरी नज़्में

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई दिल टूटने पर एक दर्द भरी ग़ज़ल, जिसमें जुदाई के एहसास और बिछड़ने के ग़म को बयां किया गया है।

Saturday, September 19, 2026
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दिल टूटा ग़ज़ल: Furkan S Khan की दर्द भरी नज़्में
“दिल टूटा ग़ज़ल: Furkan S Khan की दर्द भरी नज़्में”
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19 September 2026
दिल टूटा ग़ज़ल: Furkan S Khan की दर्द भरी नज़्में
Ghazal
लबों पे हँसी है, पर दिल में है सैंकड़ों घाव, कैसे बताऊँ तुझे, मेरा दिल टूटा है यार। हर लम्हा तड़पता हूँ, तेरी यादों में खोया, बिना तेरे जीना अब, नहीं है मेरे लिए करार। वो हसीन पल जो बीते थे, तेरे संग ओ सनम, लौट आएँ वो खुशियाँ, दे जा मुझको बहार। आँखों से बहते अश्क, बताते हैं दास्ताँ, तेरे जाने से टूटा, मेरा हर इक ख़्वाब-ओ-यार।
Kaafiya यार, करार, बहार Radeef आ
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
वो चला गया, जो मेरा सब कुछ था, अब कैसे जियूँ, ये कैसी ख़ुदग़रज़ी है। हर पल सताती है, तेरी यादों की चुभन, बिना तेरे मेरी, क्या कोई बंदगी है। सूनी राहों में, भटकता फिरता हूँ, क्या यही मेरी, ख़्वाहिशों की सरंदगी है। जो कभी था मेरा, वो अब पराया है, दिल टूटा है मेरा, ये कैसी ज़िंदगी है।
Kaafiya ज़िंदगी, बंदगी, सरंदगी Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

घाव: चोट, ज़ख़्म। तड़पता हूँ: व्याकुल हूँ, बेचै𝙿ी से भरा हूँ। सनम: प्रियतम। अश्क: आँसू। दास्ताँ: कहानी।

ख़ुदग़रज़ी: स्वार्थ। बंदगी: इबादत, भक्ति। सरंदगी: लाचारी, बेबसी।

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Zainab Khatoon
लेखक

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