दर्द-ए-दिल की दास्तान: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदास ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान की यह ग़ज़ल दिल के दर्द, तन्हाई और ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों को बयाँ करती है। पढ़िए उदासी से भरी एक मार्मिक प्रस्तुति।

Monday, September 14, 2026
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दर्द-ए-दिल की दास्तान: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदास ग़ज़ल
“दर्द-ए-दिल की दास्तान: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदास ग़ज़ल”
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14 September 2026
दर्द-ए-दिल की दास्तान: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदास ग़ज़ल
Ghazal
दर्द-ए-दिल की दास्तान अब किससे कहें, क्या करें? ज़िंदगी ने दी है ऐसी सज़ा, अब किससे सहें, क्या करें? फूल खिलते थे कभी जिन राहों में, अब काँटे हैं वहाँ, मौसम-ए-गुल की वो शोख़ हवा, अब किससे कहें, क्या करें? जिस वफ़ा की थी तमन्ना उम्र भर, वो मिली ही नहीं, बेवफ़ाई की मिली है जज़ा, अब किससे कहें, क्या करें? यार भी हमसे खफ़ा हैं, दुनिया भी है बेज़ार अब, एक दर्द-ए-बेइंतिहा है, अब किससे कहें, क्या करें? रात भर आँसू बहाते हैं, सुबह तक जागते हैं हम, इस दिल की तन्हाई की दवा, अब किससे कहें, क्या करें?
Kaafiya सज़ा, हवा, जज़ा, खफ़ा, दवा Radeef क्या करें
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
दिल पे गुज़रे हैं जो इतने सितम, अब क्या कहूँ, दर्द में डूबे हुए हैं हम, अब क्या कहूँ। आँख से बहते नहीं अब अश्क भी मेरे कभी, सूख गए हैं सारे चश्म-ए-नम, अब क्या कहूँ। जिनसे उम्मीद-ए-वफ़ा थी, वो भी निकले बेवफ़ा, टूट गए हैं सारे मेरे भ्रम, अब क्या कहूँ। दूर तक कोई सहारा भी नज़र आता नहीं, ज़िंदगी है एक अधूरा सा ग़म, अब क्या कहूँ। मर गए अरमान सारे, साँस चलती है मगर, ज़िंदगी में रह गई है खुशी अब कम, अब क्या कहूँ।
Kaafiya सितम, हम, नम, भ्रम, ग़म, कम Radeef क्या कहूँ
F Poetry ByFurkan S Khan

दास्तान: कहानी, कथा सज़ा: दंड, पनिशमेंट मौसम-ए-गुल: बसंत का मौसम, फूलों का मौसम शोख़: चंचल, शरारती वफ़ा: वफादारी, निष्ठा तमन्ना: इच्छा, चाहत जज़ा: बदला, परिणाम खफ़ा: नाराज़, रुष्ट बेज़ार: ऊबा हुआ, परेशान बेइंतिहा: जिसकी कोई सीमा न हो, असीमित तन्हाई: अकेलापन दवा: औषधि, इलाज

सितम: ज़ुल्म, अत्याचार अश्क: आँसू चश्म-ए-नम: नम आँखें, आँसुओं से भरी आँखें उम्मीद-ए-वफ़ा: वफ़ादारी की उम्मीद बेवफ़ा: धोखेबाज़, वफ़ादार न रहने वाला भ्रम: गलतफहमी, वहम ग़म: दुख, उदासी अरमान: इच्छाएँ, ख्वाहिशें

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Zainab Khatoon
लेखक

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