वीरान: सुनसान, कहर: मुसीबत या आफत, रूह: आत्मा। ज़वाल: पतन या अंत, मलाल: पछतावा या दुख।
हम और ज़िंदगी उदासी का मंज़र: एक दर्द भरी ग़ज़ल Zainab Khatoon 1 month ago उदासी और तन्हाई के अहसासात को बयां करती एक खूबसूरत ग़ज़ल। वीरान: सुनसान, कहर: मुसीबत या आफत, रूह: आत्मा। ज़वाल: पतन या अंत, मलाल: पछतावा या दुख। View Full Story & Comments Related Posts इंतज़ार की गहराई: बेचैन दिल की कविता | Furkan S Khan दीदार की हसरत: रूहानी इश्क़ की इस्लामी नज़्म | Furkan S अस्वीकृति का घाव: प्रेम में टूटे दिल की मार्मिक कविता साहस की लौ: जीवन के तूफानों में जलती हिम्मत की शायरी